श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 207: श्रीकृष्णसे सम्पूर्ण भूतोंकी उत्पत्तिका तथा उनकी महिमाका कथन  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  12.207.4 
असितो देवलस्तात वाल्मीकिश्च महातपा:।
मार्कण्डेयश्च गोविन्दे कथयन्त्यद्भुतं महत् ॥ ४॥
 
 
अनुवाद
तात! असित, देवल, महातपस्वी वाल्मीकि और महर्षि मार्कण्डेय भी भगवान गोविन्द के विषय में अद्भुत बातें कहते हैं॥4॥
 
Tat! Asit, Deval, great ascetic Valmiki and Maharishi Markandeya also say wonderful things about Lord Govind. 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)