Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.207.11-12: संकर्षण ही समस्त प्राणियों को धारण करने वाला तथा भूत और भविष्य का आधार है। महाबाहु महात्मा संकर्षण के प्रकट होने पर श्रीहरि की नाभि से एक दिव्य कमल प्रकट हुआ, जो सूर्य के समान प्रकाशमान था। ॥11-12॥ | mahabharat अध्याय 12.207: श्रीकृष्णसे सम्पूर्ण भूतोंकी उत्पत्तिका तथा उनकी महिमाका कथन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स धारयति भूतानि उभे भूतभविष्यती॥ ११॥
ततस्तस्मिन् महाबाहौ प्रादुर्भूते महात्मनि।
भास्करप्रतिमं दिव्यं नाभ्यां पद्ममजायत॥ १२॥
अनुवाद
संकर्षण ही समस्त प्राणियों को धारण करने वाला तथा भूत और भविष्य का आधार है। महाबाहु महात्मा संकर्षण के प्रकट होने पर श्रीहरि की नाभि से एक दिव्य कमल प्रकट हुआ, जो सूर्य के समान प्रकाशमान था। ॥11-12॥
It is Sankarshan who holds all beings and is the basis of the past and the future. After the appearance of the mighty-armed Mahatma Sankarshan, a divine lotus appeared from the navel of Shri Hari, which was as luminous as the sun. ॥11-12॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥