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mahabharat 12.206.8: समस्त ज्ञान, परिणाम, ज्ञेय और कर्म के समाप्त हो जाने पर जो कुछ भी प्राप्ति के फलस्वरूप शेष रह जाए, उसे तू समस्त ज्ञेय में व्याप्त ज्ञानस्वरूप परमेश्वर ही समझ ॥8॥   |   mahabharat अध्याय 12.206: परमात्मतत्त्वका निरूपण—मनु-बृहस्पति-संवादकी समाप्ति   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 206: परमात्मतत्त्वका निरूपण—मनु-बृहस्पति-संवादकी समाप्ति  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  12.206.8 
ज्ञानानां च फलानां च ज्ञेयानां कर्मणां तथा।
क्षयान्ते यत् फलं विद्याज्ज्ञानं ज्ञेयप्रतिष्ठितम्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
समस्त ज्ञान, परिणाम, ज्ञेय और कर्म के समाप्त हो जाने पर जो कुछ भी प्राप्ति के फलस्वरूप शेष रह जाए, उसे तू समस्त ज्ञेय में व्याप्त ज्ञानस्वरूप परमेश्वर ही समझ ॥8॥
 
After the end of all knowledge, results, knowable and action, whatever remains as a result of attainment, you should consider that to be God in the form of knowledge, pervaded in all the knowable. 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)