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mahabharat 12.206.4: मनुष्य जिस भी शरीर से जो भी कर्म करता है, वह उसी शरीर से उन कर्मों का फल भोगता है ॥4॥   |   mahabharat अध्याय 12.206: परमात्मतत्त्वका निरूपण—मनु-बृहस्पति-संवादकी समाप्ति   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 206: परमात्मतत्त्वका निरूपण—मनु-बृहस्पति-संवादकी समाप्ति  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  12.206.4 
येन येन शरीरेण यद्यत्कर्म करोत्ययम्।
तेन तेन शरीरेण तत् तत् फलमुपाश्नुते॥ ४॥
 
 
अनुवाद
मनुष्य जिस भी शरीर से जो भी कर्म करता है, वह उसी शरीर से उन कर्मों का फल भोगता है ॥4॥
 
Whatever deeds a man performs with whatever body, he reaps the fruits of those deeds with that body. ॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)