Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.206.26: जो व्यक्ति बुद्धि में निपुण है, अर्थात् जो शुद्ध और सूक्ष्म बुद्धि से युक्त है और मानसिक बल से युक्त है, वह समस्त कामनाओं से परे निर्गुण ब्रह्म को प्राप्त कर लेता है। जिस प्रकार वायु लकड़ी में अदृश्य अग्नि को जलाए बिना ही छोड़ देती है, उसी प्रकार कामनाओं से व्याकुल मनुष्य भी अपने शरीर में स्थित ईश्वर को त्याग देते हैं, अर्थात् उसे जानने और प्राप्त करने का प्रयास नहीं करते। | mahabharat अध्याय 12.206: परमात्मतत्त्वका निरूपण—मनु-बृहस्पति-संवादकी समाप्ति । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जो व्यक्ति बुद्धि में निपुण है, अर्थात् जो शुद्ध और सूक्ष्म बुद्धि से युक्त है और मानसिक बल से युक्त है, वह समस्त कामनाओं से परे निर्गुण ब्रह्म को प्राप्त कर लेता है। जिस प्रकार वायु लकड़ी में अदृश्य अग्नि को जलाए बिना ही छोड़ देती है, उसी प्रकार कामनाओं से व्याकुल मनुष्य भी अपने शरीर में स्थित ईश्वर को त्याग देते हैं, अर्थात् उसे जानने और प्राप्त करने का प्रयास नहीं करते।
A person who is proficient in intelligence i.e. one who is endowed with pure and subtle intelligence and has mental strength, attains Nirguna Brahma beyond all desires. Just as the wind leaves the invisible fire in the wood without even lighting it, in the same way men who are distraught with desires also abandon the God present within their body, that is, they do not try to know and attain Him.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥