श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 204: आत्मा एवं परमात्माके साक्षात्कारका उपाय तथा महत्त्व  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  12.204.16 
विषया विनिवर्तन्ते निराहारस्य देहिन:।
रसवर्जं रसोऽप्यस्य परं दृष्ट्वा निवर्तते॥ १६॥
 
 
अनुवाद
इन्द्रियों द्वारा विषयों का अनुभव न होने के कारण मनुष्य के वे विषय तो दूर हो जाते हैं; परन्तु उनमें उसकी आसक्ति बनी रहती है। ईश्वर प्राप्ति के पश्चात् मनुष्य की आसक्ति भी दूर हो जाती है ॥16॥
 
Due to non-apprehension of the objects by the senses, those objects of the man go away; But his attachment to them remains. After realizing God, man's attachment also goes away. 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)