Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.202.22: जब आत्मा अपने कर्मों से प्राप्त नए शरीर में निवास करती है, तब उसे पूर्व में किए गए शुभ-अशुभ कर्मों का फल प्राप्त होता है। जैसे जलचर जल के अनुकूल प्रवाह का अनुसरण करते हैं, वैसे ही पूर्व में किए गए शुभ-अशुभ कर्म मन का अनुसरण करते हैं, अर्थात् मन के माध्यम से फल देते हैं।॥ 22॥ | mahabharat अध्याय 12.202: आत्मतत्त्वका और बुद्धि आदि प्राकृत पदार्थोंका विवेचन तथा उसके साक्षात्कारका उपाय । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जब आत्मा अपने कर्मों से प्राप्त नए शरीर में निवास करती है, तब उसे पूर्व में किए गए शुभ-अशुभ कर्मों का फल प्राप्त होता है। जैसे जलचर जल के अनुकूल प्रवाह का अनुसरण करते हैं, वैसे ही पूर्व में किए गए शुभ-अशुभ कर्म मन का अनुसरण करते हैं, अर्थात् मन के माध्यम से फल देते हैं।॥ 22॥
When the soul resides in a new body acquired by its own deeds, it receives the fruits of the good and bad deeds it had done earlier. Just as aquatic animals follow the favorable flow of water, similarly the good and bad deeds done earlier follow the mind, i.e., they yield results through the mind.॥ 22॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥