श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 202: आत्मतत्त्वका और बुद्धि आदि प्राकृत पदार्थोंका विवेचन तथा उसके साक्षात्कारका उपाय  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  12.202.21 
महत्सु भूतेषु वसन्ति पञ्च
पञ्चेन्द्रियार्थाश्च तथेन्द्रियाणि।
सर्वाणि चैतानि मनोऽनुगानि
बुद्धिं मनोऽन्वेति मति: स्वभावम्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
पाँच इन्द्रियों के पाँच विषय और पाँच ज्ञानेन्द्रियाँ भी पाँच सूक्ष्म महाभूतों में निवास करती हैं, ये शब्द, विषय, आकाश, भूत और श्रोता आदि इन्द्रियाँ सभी मन का अनुसरण करती हैं। मन बुद्धि का अनुसरण करता है और बुद्धि आत्मा का आश्रय लेती है। 21॥
 
The five subjects of the five senses and the five senses also reside in the five subtle Mahabhutas, these senses like words, objects, sky, ghosts and listeners all follow the mind. The mind follows the intellect and the intellect takes the shelter of the soul. 21॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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