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mahabharat 12.201.6: हे प्रभु! वह कौन सी प्राचीन वस्तु है जिससे पृथ्वी, पार्थिव पदार्थ, वायु, आकाश, जलचर, जल, स्वर्ग और देवता उत्पन्न हुए हैं? कृपया मुझे यह बताइए।   |   mahabharat अध्याय 12.201: बृहस्पतिके प्रश्नके उत्तरमें मनुद्वारा कामनाओंके त्यागकी एवं ज्ञानकी प्रशंसा तथा परमात्मतत्त्वका निरूपण   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.201.6 
मही महीजा: पवनोऽन्तरिक्षं
जलौकसश्चैव जलं दिवं च।
दिवौकसश्चापि यत: प्रसूता-
स्तदुच्यतां मे भगवन् पुराणम्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! वह कौन सी प्राचीन वस्तु है जिससे पृथ्वी, पार्थिव पदार्थ, वायु, आकाश, जलचर, जल, स्वर्ग और देवता उत्पन्न हुए हैं? कृपया मुझे यह बताइए।
 
O Lord! What is that ancient thing from which the earth, earthly objects, air, sky, aquatic creatures, water, heaven and gods originate? Please tell me this.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)