Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.201.5: वह कौन-सा सुखदायक फल है, जिसकी पूजा अर्थशास्त्र, आगम (वेद) और मन्त्रों को जानने वाले विद्वान पुरुष अनेक महान यज्ञों और गौओं के दान से करते हैं; वह कैसे प्राप्त होता है और उसका स्थान कहाँ है?॥5॥ | mahabharat अध्याय 12.201: बृहस्पतिके प्रश्नके उत्तरमें मनुद्वारा कामनाओंके त्यागकी एवं ज्ञानकी प्रशंसा तथा परमात्मतत्त्वका निरूपण । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यच्चार्थशास्त्रागममन्त्रविद्भि-
र्यज्ञैरनेकैरथ गोप्रदानै:।
फलं महद्भिर्यदुपास्यते च
किं तत्कथं वा भविता क्व वा तत्॥ ५॥
अनुवाद
वह कौन-सा सुखदायक फल है, जिसकी पूजा अर्थशास्त्र, आगम (वेद) और मन्त्रों को जानने वाले विद्वान पुरुष अनेक महान यज्ञों और गौओं के दान से करते हैं; वह कैसे प्राप्त होता है और उसका स्थान कहाँ है?॥5॥
What is that happy fruit which is worshiped by learned men having knowledge of Arthashastra, Agama (Vedas) and Mantras by performing numerous great sacrifices and donating cows; how is it attained and where is its location? ॥ 5॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥