| श्री महाभारत » पर्व 12: शान्ति पर्व » अध्याय 200: जापक ब्राह्मण और राजा इक्ष्वाकुकी उत्तम गतिका वर्णन तथा जापकको मिलनेवाले फलकी उत्कृष्टता » श्लोक 9-13 |
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| | | | श्लोक 12.200.9-13  | भीष्म उवाच
व्यवसायं तयोस्तत्र विदित्वा त्रिदशेश्वर:।
सह देवैरुपययौ लोकपालैस्तथैव च॥ ९॥
साध्याश्च विश्वे मरुतो वाद्यानि सुमहान्ति च।
नद्य: शैला: समुद्राश्च तीर्थानि विविधानि च॥ १०॥
तपांसि संयोगविधिर्वेदा: स्तोभा: सरस्वती।
नारद: पर्वतश्चैव विश्वावसुर्हहाहुहू:॥ ११॥
गन्धर्वश्चित्रसेनश्च परिवारगणैर्युत:।
नागा: सिद्धाश्च मुनयो देवदेव: प्रजापति:॥ १२॥
विष्णु: सहस्रशीर्षश्च देवोऽचिन्त्य: समागमत् ।
अवाद्यन्तान्तरिक्षे च भेर्यस्तूर्याणि वा विभो॥ १३॥ | | | | | | अनुवाद | | भीष्मजी कहते हैं - राजन! उन दोनों का निश्चय जानकर देवराज इन्द्र समस्त देवताओं और लोकपालों के साथ उस स्थान पर आये। उनके साथ साध्यगण, विश्वदेवगण और मरुद्गण भी थे। बड़े-बड़े बाजे बज रहे थे। नदियाँ, पर्वत, समुद्र, नाना प्रकार के तीर्थ, तपस्याएँ, संयोगविधि, वेद, स्तोभ (साम-गान की सिद्धि के लिए कहे गए वचन), सरस्वती, नारद, पर्वत, विश्वावसु, हाहा, हूहू, परिवार सहित चित्रसेन गंधर्व, नाग, सिद्ध, मुनि, देवाधिदेव प्रजापति ब्रह्मा, सहस्र सिरों वाले शेषनाग और अचिन्त्य देव भगवान विष्णु भी वहाँ आ पहुँचे। प्रभो! उस समय आकाश में शहनाई और तुरही आदि बाजे बज रहे थे। | | | | Bhishmaji says – King! Knowing about the determination of both of them there, Devraj Indra along with all the Gods and Lokpals came to that place. He was accompanied by Sadhyagan, Vishwadevgan and Marudgan. Big instruments were playing. Rivers, mountains, seas, different types of pilgrimages, penances, Sanyogvidhi, Vedas, Stobhas (words spoken for the fulfillment of Sama-gaan), Saraswati, Narada, mountains, Vishvavasu, Haha, Huhu, Chitrasen Gandharva with his family, Naga, Siddha, Muni, Devadhidev Prajapati Brahma, Sheshnag with thousands of heads and the unthinkable god Lord Vishnu also arrived there. Lord! At that time musical instruments like clarinets and trumpets were playing in the sky. 9-13॥ | | ✨ ai-generated | | |
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