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mahabharat 12.200.8: ब्राह्मण बोला, "हे राजन! मैंने यहाँ सबके सामने आपको अपने जप का फल देने का बहुत प्रयत्न किया है; फिर भी आप दोनों मिलकर फल खाने पर अड़े हैं; इसलिए हम दोनों को फल बराबर-बराबर बाँटना चाहिए। आइए, जहाँ तक हो सके, हम साथ-साथ चलें।"   |   mahabharat अध्याय 12.200: जापक ब्राह्मण और राजा इक्ष्वाकुकी उत्तम गतिका वर्णन तथा जापकको मिलनेवाले फलकी उत्कृष्टता   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.200.8 
ब्राह्मण उवाच
कृत: प्रयत्न: सुमहान् सर्वेषां संनिधाविह।
सह तुल्यफलावावां गच्छावो यत्र नौ गति:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
ब्राह्मण बोला, "हे राजन! मैंने यहाँ सबके सामने आपको अपने जप का फल देने का बहुत प्रयत्न किया है; फिर भी आप दोनों मिलकर फल खाने पर अड़े हैं; इसलिए हम दोनों को फल बराबर-बराबर बाँटना चाहिए। आइए, जहाँ तक हो सके, हम साथ-साथ चलें।"
 
The Brahmin said, "O King! I have made great efforts to give you the fruits of my Japa in front of everyone here; yet you have insisted on enjoying the fruits together; therefore both of us should share the fruits equally. Come, let us go together as far as we can." 8.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)