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ब्राह्मण उवाच
कृत: प्रयत्न: सुमहान् सर्वेषां संनिधाविह।
सह तुल्यफलावावां गच्छावो यत्र नौ गति:॥ ८॥
अनुवाद
ब्राह्मण बोला, "हे राजन! मैंने यहाँ सबके सामने आपको अपने जप का फल देने का बहुत प्रयत्न किया है; फिर भी आप दोनों मिलकर फल खाने पर अड़े हैं; इसलिए हम दोनों को फल बराबर-बराबर बाँटना चाहिए। आइए, जहाँ तक हो सके, हम साथ-साथ चलें।"
The Brahmin said, "O King! I have made great efforts to give you the fruits of my Japa in front of everyone here; yet you have insisted on enjoying the fruits together; therefore both of us should share the fruits equally. Come, let us go together as far as we can." 8.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥