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mahabharat 12.200.30-31: ब्रह्माजी बोले- हे देवताओं! जो महास्मृति और शुभ अनुस्मृति का पाठ करता है, वह भी इसी विधि से मेरे सालोक्य को प्राप्त होता है। जो योग का साधक है, वह भी मृत्यु के पश्चात इसी विधि से मेरे लोकों को प्राप्त होता है, इसमें संशय नहीं है। अब तुम सब अपनी-अपनी अभीष्ट सिद्धि के लिए अपने-अपने लोकों को जाओ। मैं तुम सबकी अभीष्ट साधना करता रहूँगा॥ 30-31॥   |   mahabharat अध्याय 12.200: जापक ब्राह्मण और राजा इक्ष्वाकुकी उत्तम गतिका वर्णन तथा जापकको मिलनेवाले फलकी उत्कृष्टता   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.200.30-31 
ब्रह्मोवाच
महास्मृतिं पठेद् यस्तु तथैवानुस्मृतिं शुभाम्।
तावप्येतेन विधिना गच्छेतां मत्सलोकताम्॥ ३०॥
यश्च योगे भवेद् भक्त: सोऽपि नास्त्यत्र संशय:।
विधिनानेन देहान्ते मम लोकानवाप्नुयात्।
साधये गम्यतां चैव यथास्थानानि सिद्धये॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्माजी बोले- हे देवताओं! जो महास्मृति और शुभ अनुस्मृति का पाठ करता है, वह भी इसी विधि से मेरे सालोक्य को प्राप्त होता है। जो योग का साधक है, वह भी मृत्यु के पश्चात इसी विधि से मेरे लोकों को प्राप्त होता है, इसमें संशय नहीं है। अब तुम सब अपनी-अपनी अभीष्ट सिद्धि के लिए अपने-अपने लोकों को जाओ। मैं तुम सबकी अभीष्ट साधना करता रहूँगा॥ 30-31॥
 
Brahmaji said- O Gods! One who recites Mahasmriti and auspicious Anusmriti also attains my Salokya by this method. One who is a devotee of Yoga also attains my worlds by this method after death, there is no doubt in this. Now all of you go to your respective places for your desired success. I will keep on doing the desired sadhna of you all.॥ 30-31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)