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श्लोक 12.200.23  |
भूयश्चैवापरं प्राह वचनं मधुरं तदा।
जापकैस्तुल्यफलता योगानां नात्र संशय:॥ २३॥ |
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| अनुवाद |
| ब्रह्माजी ने उस तेजस्वी पुरुष का स्वागत करके पुनः मधुर वाणी में उससे कहा - 'हे ब्राह्मण! जो फल योगी को मिलता है, वही फल निःसंदेह मन्त्र जपने वाले को भी प्राप्त होता है॥ 23॥ |
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| After welcoming that radiant person, Brahma once again spoke to him in a sweet voice - 'O Brahmin! Whatever result a yogi gets, the same result is undoubtedly received by those who chant mantras as well.॥ 23॥ |
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