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mahabharat 12.20.6: राजन! आपको यह जानना चाहिए कि ऋषियों में भी कुछ लोग अपने कर्म और तप में तत्पर रहते हैं। कुन्तीनन्दन! वैखानस महात्माओं के वचन इस प्रकार सुने जाते हैं -॥6॥   |   mahabharat अध्याय 12.20: मुनिवर देवस्थानका राजा युधिष्ठिरको यज्ञानुष्ठानके लिये प्रेरित करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 20: मुनिवर देवस्थानका राजा युधिष्ठिरको यज्ञानुष्ठानके लिये प्रेरित करना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  12.20.6 
कर्मनिष्ठांश्च बुद्धॺेथास्तपोनिष्ठांश्च पार्थिव।
वैखानसानां कौन्तेय वचनं श्रूयते यथा॥ ६॥
 
 
अनुवाद
राजन! आपको यह जानना चाहिए कि ऋषियों में भी कुछ लोग अपने कर्म और तप में तत्पर रहते हैं। कुन्तीनन्दन! वैखानस महात्माओं के वचन इस प्रकार सुने जाते हैं -॥6॥
 
Rajan! You should know that among the sages, some people are also dedicated to their work and penance. Kuntinandan! The words of Vaikhanas Mahatmas are heard in this way -॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)