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श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 2: नारदजीका कर्णको शाप प्राप्त होनेका प्रसंग सुनाना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  12.2.8 
स सख्यमकरोद् बाल्ये राज्ञा दुर्योधनेन च।
युष्माभिर्नित्यसंद्विष्टो दैवाच्चापि स्वभावत:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
इसीलिए बचपन में ही राजा दुर्योधन से उनकी मित्रता हो गई थी और दैवीय प्रेरणा तथा स्वभाव से ही वे आप लोगों से सदैव द्वेष रखते थे।
 
That is why he became friends with King Duryodhana in his childhood itself and due to divine inspiration as well as by nature, he always harbored animosity towards you all.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)