Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.2.18: उस पर्वत पर श्रेष्ठ परशुरामजी से धनुर्वेद की शिक्षा लेकर कर्ण ने धनुर्वेद का अभ्यास आरम्भ किया। वह देवताओं, दानवों तथा राक्षसों का अत्यन्त प्रिय हो गया। | mahabharat अध्याय 12.2: नारदजीका कर्णको शाप प्राप्त होनेका प्रसंग सुनाना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स तत्रेष्वस्त्रमकरोद् भृगुश्रेष्ठाद् यथाविधि।
प्रियश्चाभवदत्यर्थं देवदानवरक्षसाम्॥ १८॥
अनुवाद
उस पर्वत पर श्रेष्ठ परशुरामजी से धनुर्वेद की शिक्षा लेकर कर्ण ने धनुर्वेद का अभ्यास आरम्भ किया। वह देवताओं, दानवों तथा राक्षसों का अत्यन्त प्रिय हो गया।
On that mountain, Karna started practicing Dhanurveda after learning Dhanurveda from the best Parashuramji on that mountain. He became very dear to the gods, demons and rakshasas.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥