श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 2: नारदजीका कर्णको शाप प्राप्त होनेका प्रसंग सुनाना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  12.2.13 
ब्रह्मास्त्रं ब्राह्मणो विद्याद् यथावच्चरितव्रत:।
क्षत्रियो वा तपस्वी यो नान्यो विद्यात् कथंचन॥ १३॥
 
 
अनुवाद
‘बेटा! ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करने वाला ब्राह्मण अथवा तपस्वी क्षत्रिय ही ब्रह्मास्त्र को जान सकता है। अन्य कोई उसे किसी भी प्रकार नहीं सीख सकता।’॥13॥
 
‘Son! Only a Brahmin who has strictly followed the vow of celibacy or an ascetic Kshatriya can know the Brahmastra. No one else can learn it in any way.'॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)