श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 199: जापकको सावित्रीका वरदान, उसके पास धर्म, यम और काल आदिका आगमन,राजा इक्ष्वाकु और जापक ब्राह्मणका संवाद, सत्यकी महिमा तथा जापककी परम गतिका वर्णन  »  श्लोक 71
 
 
श्लोक  12.199.71 
सत्ये कुरु स्थिरं भावं मा राजन्ननृतं कृथा:।
कस्मात्त्वमनृतं वाक्यं देहीति कुरुषेऽशुभम्॥ ७१॥
 
 
अनुवाद
महाराज! सत्य पर मन लगाओ। मिथ्या आचरण मत करो। यदि लेना ही नहीं था तो यह मिथ्या और अशुभ वचन 'दे दो' क्यों कहा?
 
Maharaj! Fix your mind on the truth. Do not behave falsely. If you did not want to take it then why did you utter this false and inauspicious word 'give it'? 71.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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