श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 199: जापकको सावित्रीका वरदान, उसके पास धर्म, यम और काल आदिका आगमन,राजा इक्ष्वाकु और जापक ब्राह्मणका संवाद, सत्यकी महिमा तथा जापककी परम गतिका वर्णन  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  12.199.20 
धर्म उवाच
द्विजाते पश्य मां धर्ममहं त्वां द्रष्टुमागत:।
जप्यस्यास्य फलं यत्तत् सम्प्राप्तं तच्च मे शृणु॥ २०॥
 
 
अनुवाद
धर्म ने कहा- हे ब्राह्मण! मेरी ओर देखो। मैं धर्म हूँ और तुम्हारे दर्शन करने आया हूँ। इस जप से तुम्हें जो लाभ हुआ है, उसके विषय में मुझसे सुनो।
 
Dharma said- O Brahmin! Look at me. I am Dharma and I have come to see you. Listen to me about the benefits you have received from this Japa.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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