श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 199: जापकको सावित्रीका वरदान, उसके पास धर्म, यम और काल आदिका आगमन,राजा इक्ष्वाकु और जापक ब्राह्मणका संवाद, सत्यकी महिमा तथा जापककी परम गतिका वर्णन  »  श्लोक 17-18h
 
 
श्लोक  12.199.17-18h 
भीष्म उवाच
एवमुक्त्वा भगवती जगाम भवनं स्वकम्॥ १७॥
ब्राह्मणोऽपि जपन्नास्ते दिव्यं वर्षशतं तथा।
 
 
अनुवाद
भीष्मजी कहते हैं - राजन् ! ऐसा कहकर भगवती सावित्री देवी अपने धाम को चली गईं और वह ब्राह्मण भी सौ वर्षों तक ईश्वरीय कीर्तन में लगा रहा ॥17 1/2॥
 
Bhishmaji says – King! Saying this, Bhagwati Savitri Devi went to her abode and the Brahmin also remained engaged in divine chanting for hundred years. 17 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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