श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 199: जापकको सावित्रीका वरदान, उसके पास धर्म, यम और काल आदिका आगमन,राजा इक्ष्वाकु और जापक ब्राह्मणका संवाद, सत्यकी महिमा तथा जापककी परम गतिका वर्णन  »  श्लोक 114
 
 
श्लोक  12.199.114 
राजोवाच
जलमेतन्निपतितं मम पाणौ द्विजोत्तम।
सममस्तु सहैवास्तु प्रतिगृह्णातु वै भवान्॥ ११४॥
 
 
अनुवाद
राजा ने कहा, "हे श्रेष्ठ ब्राह्मण! यह संकल्परूपी जल मेरे हाथ में है। मेरे और आपके सभी पुण्य हम दोनों के लिए समान हों और हम दोनों मिलकर उनका उपभोग करें; इस हेतु आप मेरा दान भी स्वीकार करें।" 114.
 
The king said, "O great Brahmin! I have this water of resolution on my hand. May all the merits of mine and yours be equal for both of us and we may enjoy them together; for this purpose, please accept my donation as well." 114.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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