श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 198: परमधामके अधिकारी जापकके लिये देवलोक भी नरक-तुल्य हैं—इसका प्रतिपादन  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  12.198.9 
काल: सम्पद्यते तत्र कालस्तत्र न वै प्रभु:।
स कालस्य प्रभू राजन् स्वर्गस्यापि तथेश्वर:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
महाराज! काल की उत्पत्ति भी वहीं से होती है। उस धाम पर काल का कोई अधिकार नहीं है। वह परमात्मा काल का स्वामी होने के साथ-साथ स्वर्ग का भी ईश्वर है।
 
King! Time also originates from there. Time has no authority over that abode. That Supreme Soul is the master of time as well as the God of heaven.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)