| श्री महाभारत » पर्व 12: शान्ति पर्व » अध्याय 198: परमधामके अधिकारी जापकके लिये देवलोक भी नरक-तुल्य हैं—इसका प्रतिपादन » श्लोक 5-6 |
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| | | | श्लोक 12.198.5-6  | चतुर्णां लोकपालानां शुक्रस्याथ बृहस्पते:।
मरुतां विश्वदेवानां साध्यानामश्विनोरपि॥ ५॥
रुद्रादित्यवसूनां च तथान्येषां दिवौकसाम्।
एते वै निरयास्तात स्थानस्य परमात्मन:॥ ६॥ | | | | | | अनुवाद | | तात! वरुण, कुबेर, इंद्र और यमराज - ये चार विश्वपाल, शुक्र, बृहस्पति, मरुद्गण, विश्वेदेव, साध्य, अश्विनी कुमार, रुद्र, आदित्य, वसु और ऐसे अन्य देवता, ये सभी भगवान के परमधाम के सामने नरक हैं। 5-6॥ | | | | Tat! Varun, Kuber, Indra and Yamraj - these four world guardians, Shukra, Brihaspati, Marudgana, Vishvedev, Sadhya, Ashwini Kumar, Rudra, Aditya, Vasu and other such gods, all of them are hell in front of the supreme abode of God. 5-6॥ | | ✨ ai-generated | | |
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