Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.198.11: राजन! इस प्रकार मैंने तुम्हें इन सब नरकों का यथार्थ स्वरूप बताया है। उस परमधाम के समक्ष ये सब लोक वास्तव में 'नरक' कहलाने के योग्य हैं। ॥11॥ | mahabharat अध्याय 12.198: परमधामके अधिकारी जापकके लिये देवलोक भी नरक-तुल्य हैं—इसका प्रतिपादन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एते ते निरया: प्रोक्ता: सर्व एव यथातथम्।
तस्य स्थानवरस्येह सर्वे निरयसंज्ञिता:॥ ११॥
अनुवाद
राजन! इस प्रकार मैंने तुम्हें इन सब नरकों का यथार्थ स्वरूप बताया है। उस परमधाम के समक्ष ये सब लोक वास्तव में 'नरक' कहलाने के योग्य हैं। ॥11॥
King! In this way I have told you about all these hells in their true form. In front of that supreme abode all these worlds are indeed worthy of being called 'hell'. ॥11॥
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि मोक्षधर्मपर्वणि जापकोपाख्याने अष्टनवत्यधिकशततमोऽध्याय:॥ १९८॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत मोक्षधर्मपर्वमें जापकका उपाख्यानविषयक एक सौ अट्ठानबेवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १९८॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥