Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.196.7: मोक्ष चाहने वाले ऋषियों ने सांख्य और योग का जो वर्णन किया है, उसमें से वेदान्त (सांख्य) में केवल जप (पवित्र मन्त्र) के त्याग का ही वर्णन किया गया है ॥7॥   |   mahabharat अध्याय 12.196: जपयज्ञके विषयमें युधिष्ठिरका प्रश्न, उसके उत्तरमें जप और ध्यानकी महिमा और उसका फल   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 196: जपयज्ञके विषयमें युधिष्ठिरका प्रश्न, उसके उत्तरमें जप और ध्यानकी महिमा और उसका फल  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  12.196.7 
सांख्ययोगौ तु यावुक्तौ मुनिभिर्मोक्षदर्शिभि:।
संन्यास एव वेदान्ते वर्तते जपनं प्रति॥ ७॥
 
 
अनुवाद
मोक्ष चाहने वाले ऋषियों ने सांख्य और योग का जो वर्णन किया है, उसमें से वेदान्त (सांख्य) में केवल जप (पवित्र मन्त्र) के त्याग का ही वर्णन किया गया है ॥7॥
 
Out of the descriptions of Sankhya and Yoga given by the sages who sought salvation, in Vedanta (Sankhya) only the renunciation of Japa (sacred mantra) has been described. ॥ 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)