श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 196: जपयज्ञके विषयमें युधिष्ठिरका प्रश्न, उसके उत्तरमें जप और ध्यानकी महिमा और उसका फल  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  12.196.5 
किं यज्ञविधिरेवैष किमेतज्जप्यमुच्यते।
एतन्मे सर्वमाचक्ष्व सर्वज्ञो ह्यसि मे मत:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
क्या यह जप भी यज्ञ की ही एक विधि है? यह जप किस वस्तु का है? कृपा करके मुझे ये सब बातें बताइए; क्योंकि मेरी मान्यता के अनुसार आप सर्वज्ञ हैं॥5॥
 
Or is this chanting also a method of Yajna? What is the thing that is being chanted? Please tell me all these things; because according to my belief you are omniscient. ॥ 5॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas