श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 196: जपयज्ञके विषयमें युधिष्ठिरका प्रश्न, उसके उत्तरमें जप और ध्यानकी महिमा और उसका फल  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  12.196.4 
जप्यस्य च विधिं कृत्स्नं वक्तुमर्हसि मेऽनघ।
जापका इति किञ्चैतत् सांख्ययोगक्रियाविधि:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
अनघ! कृपया मुझे जप की पूरी विधि बताइए। 'जपाक' शब्द का क्या अर्थ है? क्या यह सांख्ययोग, ध्यानयोग या क्रियायोग का अनुष्ठान है?॥4॥
 
Anagha! Please tell me the complete method of Japa. What is meant by the word 'Jaapaka'? Is it a ritual of Sankhya Yoga, Dhyan Yoga or Kriya Yoga?॥ 4॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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