Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.196.23: आत्मस्वरूप का साक्षात्कार करके मनुष्य अमृतस्वरूप, योगीस्वरूप, शुद्ध और शान्तस्वरूप, रजोगुण से रहित शुद्ध आत्मा को प्राप्त होता है ॥23॥ | mahabharat अध्याय 12.196: जपयज्ञके विषयमें युधिष्ठिरका प्रश्न, उसके उत्तरमें जप और ध्यानकी महिमा और उसका फल । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
आत्मस्वरूप का साक्षात्कार करके मनुष्य अमृतस्वरूप, योगीस्वरूप, शुद्ध और शान्तस्वरूप, रजोगुण से रहित शुद्ध आत्मा को प्राप्त होता है ॥23॥
By realizing the form of self, one attains the pure soul in the form of nectar, in the form of a yogi, in a pure and peaceful form, free from the qualities of passion. 23॥
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि मोक्षधर्मपर्वणि जापकोपाख्याने षण्णवत्यधिकशततमोऽध्याय:॥ १९६॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत मोक्षधर्मपर्वमें जापकका उपाख्यानविषयक एक सौ छानबेवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १९६॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥