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mahabharat 12.196.1: युधिष्ठिर ने पूछा - पितामह! आपने चारों आश्रमों और राजधर्मों का वर्णन किया तथा अनेक विषयों से संबंधित अनेक कथाएँ भी सुनाईं।1॥   |   mahabharat अध्याय 12.196: जपयज्ञके विषयमें युधिष्ठिरका प्रश्न, उसके उत्तरमें जप और ध्यानकी महिमा और उसका फल   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 196: जपयज्ञके विषयमें युधिष्ठिरका प्रश्न, उसके उत्तरमें जप और ध्यानकी महिमा और उसका फल  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  12.196.1 
युधिष्ठिर उवाच
चातुराश्रम्यमुक्तं ते राजधर्मास्तथैव च।
नानाश्रयाश्च बहव इतिहासा: पृथग्विधा:॥ १॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा - पितामह! आपने चारों आश्रमों और राजधर्मों का वर्णन किया तथा अनेक विषयों से संबंधित अनेक कथाएँ भी सुनाईं।1॥
 
Yudhishthir asked – Grandfather! You described the four ashrams and royal religions and also narrated many different stories related to many subjects. 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)