ध्यानयोग को जानने वाले साधक को चाहिए कि ऐसे विक्षेपों के समय पश्चाताप या व्यथा का अनुभव न करे; अपितु आलस्य और आसक्ति को त्याग दे और ध्यान के द्वारा पुनः अपने मन को एकाग्र करने का प्रयत्न करे ॥14॥
A seeker who knows Dhyanayoga should not experience regret or distress during such distractions; But give up laziness and attachment and try to concentrate your mind again through meditation. 14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥