श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 195: ध्यानयोगका वर्णन  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  12.195.11 
तस्य तत् पूर्वसंरुद्धमात्मन: षष्ठमान्तरम्।
स्फुरिष्यति समुद्‍भ्रान्ता विद्युदम्बुधरे यथा॥ ११॥
 
 
अनुवाद
ऐसा प्रयत्न करने से इन्द्रियों सहित मन कुछ समय के लिए स्थिर हो जाता है। पुनः अवसर पाकर जैसे बादलों में बिजली चमकती है, वैसे ही वह विषयों की ओर जाने के लिए बार-बार व्याकुल हो उठता है ॥11॥
 
By making such efforts the mind along with the senses becomes steady for a while. On getting an opportunity again, just as lightning flashes in the clouds, in the same manner it becomes restless again and again to go towards the objects. ॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)