लोक आतुरजनान् विराविण-
स्तत्तदेव बहु पश्य शोचत:।
तत्र पश्य कुशलानशोचतो
ये विदुस्तदुभयं पदं सताम्॥ ६३॥
अनुवाद
जो लोग सांसारिक सुखों की आसक्ति के कारण अशांत रहते हैं, वे अपनी स्त्री और बच्चों के लिए शोक करते हैं और उनके मरने पर फूट-फूटकर रोते हैं। तुम उनकी दुर्दशा देखो। साथ ही, जो विवेक में कुशल हैं और सत्पुरुषों को प्राप्त होने वाले दो प्रकार के पदों को, अर्थात् सगुण-उपासना और निर्गुण-उपासना के फल को जानते हैं, वे कभी शोक नहीं करते। उनकी भी दशा देखो (फिर जो मार्ग तुम्हें हितकर लगे, उसका अनुसरण करो)।॥ 63॥
People who are restless due to attachment to worldly pleasures grieve for their wives and children and weep bitterly when they die. You should see their plight. Also, those who are skilled in discrimination and know the two types of positions attained by good men, that is, the fruits of Saguna-Upasana and Nirguna-Upasana, they never grieve. Have a look at their condition also (then follow the path which seems beneficial for you).॥ 63॥
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि मोक्षधर्मपर्वणि अध्यात्मकथने चतुर्नवत्यधिकशततमोऽध्याय:॥ १९४॥
इस प्रकार श्रीमहाभारतमें शान्तिपर्वके अन्तर्गत मोक्षधर्मपर्वमें अध्यात्मतत्त्वका वर्णनविषयक एक सौ चौरानबेवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १९४॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥