श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 194: अध्यात्मज्ञानका निरूपण  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  12.194.47 
यथा वारिचर: पक्षी सलिलेन न लिप्यते।
एवमेव कृतप्रज्ञो भूतेषु परिवर्तते॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
जैसे जलचर पक्षी जल से प्रभावित नहीं होता, वैसे ही शुद्ध बुद्धि वाला बुद्धिमान पुरुष जल से प्रभावित हुए बिना ही सम्पूर्ण तत्त्वों में विचरण करता है ॥ 47॥
 
Just as an aquatic bird does not get affected by water, similarly a wise man with pure intellect moves around among all elements without getting affected by water. ॥ 47॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)