श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 194: अध्यात्मज्ञानका निरूपण  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  12.194.43 
सृजते हि गुणान् सत्त्वं क्षेत्रज्ञ: परिपश्यति।
सम्प्रयोगस्तयोरेष सत्त्वक्षेत्रज्ञयोर्ध्रुव:॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
बुद्धि गुणों का निर्माण करती है और आत्मा साक्षी होकर देखती है। बुद्धि और आत्मा का यह मिलन शाश्वत है ॥43॥
 
The intellect creates qualities and the soul watches as a witness. This union of the intellect and the soul is eternal. ॥ 43॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)