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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 194: अध्यात्मज्ञानका निरूपण
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श्लोक 31
श्लोक
12.194.31
तत्र यत् प्रीतिसंयुक्तं काये मनसि वा भवेत्।
वर्तते सात्त्विको भाव इत्याचक्षीत तत् तथा॥ ३१॥
अनुवाद
जब शरीर या मन में किसी भी प्रकार से प्रसन्नता का अनुभव हो, तब कहना चाहिए कि सात्विक भाव उत्पन्न हो गया है ॥31॥
When there is a feeling of happiness in any way in the body or mind, then it should be said that Sattvik bhaav has arisen. ॥ 31॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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