Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.194.27: सुख या हर्ष सत्त्वगुण का, दुःख रजोगुण का और आसक्ति तमोगुण का कार्य है। इस संसार में जितने भी भाव हैं, वे सब इन तीनों में समाहित हैं ॥27॥ | mahabharat अध्याय 12.194: अध्यात्मज्ञानका निरूपण । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
प्रीति: सत्त्वं रज: शोकस्तमो मोहस्तु ते त्रय:।
ये ये च भावा लोकेऽस्मिन् सर्वेष्वेतेषु वै त्रिषु॥ २७॥
अनुवाद
सुख या हर्ष सत्त्वगुण का, दुःख रजोगुण का और आसक्ति तमोगुण का कार्य है। इस संसार में जितने भी भाव हैं, वे सब इन तीनों में समाहित हैं ॥27॥
Happiness or joy is a function of Sattva Guna, grief is a function of Rajo Guna and attachment is of Tamo Guna. All the feelings that exist in this world are included in these three. 27॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥