पुरुषैरिन्द्रियाणीह वेदितव्यानि कृत्स्नश:।
तमो रजश्च सत्त्वं च तेऽपि भावास्तदाश्रिता:॥ १५॥
अनुवाद
सब मनुष्यों को अपनी इन्द्रियों (तथा मन-बुद्धि) का ध्यान रखना चाहिए और उनका पूर्ण ज्ञान रखना चाहिए; क्योंकि सत्व, रज और तम ये तीन गुण उनमें आश्रय लेते हैं॥ 15॥
All human beings should take care of their senses (and mind-intellect) and have complete knowledge about them; because these three qualities - Sattva, Raja and Tamas - take shelter in them.॥ 15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥