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mahabharat 12.193.23: हजामत बनाने, छींकने, स्नान करने और भोजन करने के बाद प्रत्येक व्यक्ति और सभी अवस्थाओं में सभी रोगियों का कर्तव्य है कि वे ब्राह्मणों को प्रणाम आदि करके उन्हें प्रसन्न करें। इससे उनकी आयु बढ़ती है॥23॥   |   mahabharat अध्याय 12.193: शिष्टाचारका फलसहित वर्णन, पापको छिपानेसे हानि और धर्मकी प्रशंसा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 193: शिष्टाचारका फलसहित वर्णन, पापको छिपानेसे हानि और धर्मकी प्रशंसा  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  12.193.23 
श्मश्रुकर्मणि सम्प्राप्ते क्षुते स्नानेऽथ भोजने।
व्याधितानां च सर्वेषामायुष्यमभिनन्दनम्॥ २३॥
 
 
अनुवाद
हजामत बनाने, छींकने, स्नान करने और भोजन करने के बाद प्रत्येक व्यक्ति और सभी अवस्थाओं में सभी रोगियों का कर्तव्य है कि वे ब्राह्मणों को प्रणाम आदि करके उन्हें प्रसन्न करें। इससे उनकी आयु बढ़ती है॥23॥
 
After shaving, sneezing, bathing and eating, it is the duty of every person and all patients in all stages to please the Brahmins by bowing to them etc. This increases their lifespan.॥23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)