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mahabharat 12.193.16: जब गुरुजन आएं, तो उन्हें बैठने के लिए आसन दो और उन्हें प्रणाम करो। गुरुजनों की पूजा करने से मनुष्य आयु, यश और धन से धन्य हो जाते हैं। 16॥   |   mahabharat अध्याय 12.193: शिष्टाचारका फलसहित वर्णन, पापको छिपानेसे हानि और धर्मकी प्रशंसा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 193: शिष्टाचारका फलसहित वर्णन, पापको छिपानेसे हानि और धर्मकी प्रशंसा  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  12.193.16 
गुरुभ्य आसनं देयं कर्तव्यं चाभिवादनम्।
गुरूनभ्यर्च्य युज्यन्ते आयुषा यशसा श्रिया॥ १६॥
 
 
अनुवाद
जब गुरुजन आएं, तो उन्हें बैठने के लिए आसन दो और उन्हें प्रणाम करो। गुरुजनों की पूजा करने से मनुष्य आयु, यश और धन से धन्य हो जाते हैं। 16॥
 
When gurus come, give them a seat to sit and pay obeisance to them. By worshiping gurus, people become blessed with life, fame and wealth. 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)