Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.193.15: अपने देश में हो या विदेश में, अपने यहाँ आए अतिथि को कभी भूखा नहीं रहने देना चाहिए। अपने कर्तव्य पालन के फलस्वरूप प्राप्त वस्तुएँ अपने बड़ों को अर्पित कर देनी चाहिए ॥15॥ | mahabharat अध्याय 12.193: शिष्टाचारका फलसहित वर्णन, पापको छिपानेसे हानि और धर्मकी प्रशंसा । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स्वदेशे परदेशे वा अतिथिं नोपवासयेत्।
काम्यकर्मफलं लब्ध्वा गुरूणामुपपादयेत्॥ १५॥
अनुवाद
अपने देश में हो या विदेश में, अपने यहाँ आए अतिथि को कभी भूखा नहीं रहने देना चाहिए। अपने कर्तव्य पालन के फलस्वरूप प्राप्त वस्तुएँ अपने बड़ों को अर्पित कर देनी चाहिए ॥15॥
Whether in one's own country or abroad, one should never let a guest who comes to him go hungry. One should offer the things received as a result of performing his duties to his elders. ॥15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥