श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 192: वानप्रस्थ और संन्यास धर्मोंका वर्णन तथा हिमालयके उत्तर पार्श्वमें स्थित उत्कृष्ट लोककी विलक्षणता एवं महत्ताका प्रतिपादन, भृगु-भरद्वाज-संवादका उपसंहार  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  12.192.9 
तत्र ह्यपापकर्माण: शुचयोऽत्यन्तनिर्मला:।
लोभमोहपरित्यक्ता मानवा निरुपद्रवा:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
वहाँ ऐसे मनुष्य रहते हैं जो पापों से रहित, शुद्ध, पूर्णतया स्वच्छ, लोभ और आसक्ति से रहित और सब प्रकार के क्लेशों से मुक्त हैं ॥9॥
 
There live human beings who are free from sins, are pure, absolutely clean, devoid of greed and attachment and are free from all kinds of troubles. ॥ 9॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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