श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 192: वानप्रस्थ और संन्यास धर्मोंका वर्णन तथा हिमालयके उत्तर पार्श्वमें स्थित उत्कृष्ट लोककी विलक्षणता एवं महत्ताका प्रतिपादन, भृगु-भरद्वाज-संवादका उपसंहार  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  12.192.7 
भरद्वाज उवाच
अस्माल्लोकात् परो लोक: श्रूयते नोपलभ्यते।
तमहं ज्ञातुमिच्छामि तद् भवान् वक्तुमर्हति॥ ७॥
 
 
अनुवाद
भरद्वाज ने पूछा - ब्रह्मन्! इस लोक से भी श्रेष्ठ एक लोक के विषय में सुना जाता है, किन्तु वह दिखाई नहीं देता। मैं उसके विषय में जानना चाहता हूँ, कृपा करके मुझे उसके विषय में बताइए ॥7॥
 
Bharadwaj asked - Brahman! It is heard of a world superior to this world, but it cannot be seen. I want to know about it, please tell me about it. ॥ 7॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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