श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 192: वानप्रस्थ और संन्यास धर्मोंका वर्णन तथा हिमालयके उत्तर पार्श्वमें स्थित उत्कृष्ट लोककी विलक्षणता एवं महत्ताका प्रतिपादन, भृगु-भरद्वाज-संवादका उपसंहार  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  12.192.27 
एष ते प्रसवो राजन् जगत: सम्प्रकीर्तित:।
निखिलेन महाप्राज्ञ किं भूय: श्रोतुमिच्छसि॥ २७॥
 
 
अनुवाद
हे परम बुद्धिमान राजन! इस प्रकार मैंने जगत की उत्पत्ति के विषय में ये सब बातें तुमसे कही हैं। अब तुम और क्या सुनना चाहते हो?॥27॥
 
O most intelligent king! Thus have I told you all these things regarding the origin of the world. What more do you want to hear?॥ 27॥
 
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि मोक्षधर्मपर्वणि भृगुभरद्वाजसंवादे द्विनवत्यधिकशततमोऽध्याय:॥ १९२॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत मोक्षधर्मपर्वमें भृगु-भरद्वाजसंवादविषयक एक सौ बानबेवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १९२॥

 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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