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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 192: वानप्रस्थ और संन्यास धर्मोंका वर्णन तथा हिमालयके उत्तर पार्श्वमें स्थित उत्कृष्ट लोककी विलक्षणता एवं महत्ताका प्रतिपादन, भृगु-भरद्वाज-संवादका उपसंहार
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श्लोक 21
श्लोक
12.192.21
उत्तर: पृथिवीभाग: सर्वपुण्यतम: शुभ:।
इहस्थास्तत्र जायन्ते ये वै पुण्यकृतो जना:॥ २१॥
अनुवाद
पृथ्वी का उत्तर भाग परम पवित्र और शुभ है। इस लोक में केवल पुण्यात्मा मनुष्य ही मृत्यु के पश्चात् उसी क्षेत्र में जन्म लेते हैं॥ 21॥
The northern part of the earth is the most sacred and auspicious. Only those virtuous people in this world are born in that region after death.॥ 21॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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