श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 192: वानप्रस्थ और संन्यास धर्मोंका वर्णन तथा हिमालयके उत्तर पार्श्वमें स्थित उत्कृष्ट लोककी विलक्षणता एवं महत्ताका प्रतिपादन, भृगु-भरद्वाज-संवादका उपसंहार  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  12.192.15 
इह श्रमो भयं मोह: क्षुधा तीव्रा च जायते।
लोभश्चार्थकृतो नॄणां येन मुह्यन्त्यपण्डिता:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
इस संसार में मनुष्य परिश्रम, भय, मोह और अत्यन्त भूख से पीड़ित रहता है। मनुष्यों में धन के प्रति विशेष लोभ होता है, जिसके कारण अज्ञानी लोग मोह में पड़ जाते हैं॥ 15॥
 
In this world, one suffers from hard work, fear, attachment and extreme hunger. Humans have a special greed for wealth, due to which ignorant people get tempted.॥ 15॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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