श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 192: वानप्रस्थ और संन्यास धर्मोंका वर्णन तथा हिमालयके उत्तर पार्श्वमें स्थित उत्कृष्ट लोककी विलक्षणता एवं महत्ताका प्रतिपादन, भृगु-भरद्वाज-संवादका उपसंहार  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  12.192.14 
इह धर्मपरा: केचित् केचिन्नैकृतिका नरा:।
सुखिता दु:खिता: केचिन्निर्धना धनिनोऽपरे॥ १४॥
 
 
अनुवाद
इस मानव-लोक में कुछ लोग धार्मिक होते हैं, तो कुछ बड़े धोखेबाज़। इसीलिए कुछ सुखी होते हैं, तो कुछ दुःखी। कुछ धनवान होते हैं, तो कुछ दरिद्र।॥14॥
 
In this human world some people are religious while some turn out to be big cheats. That is why some are happy and some are sad. Some become rich and some become poor.॥ 14॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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