श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 192: वानप्रस्थ और संन्यास धर्मोंका वर्णन तथा हिमालयके उत्तर पार्श्वमें स्थित उत्कृष्ट लोककी विलक्षणता एवं महत्ताका प्रतिपादन, भृगु-भरद्वाज-संवादका उपसंहार  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  12.192.10 
स स्वर्गसदृशो देशस्तत्र ह्युक्ता: शुभा गुणा:।
काले मृत्यु: प्रभवति स्पृशन्ति व्याधयो न च॥ १०॥
 
 
अनुवाद
वह देश स्वर्ग के समान है। वहाँ सभी सद्गुण विद्यमान बताए गए हैं। वहाँ मृत्यु समय पर होती है। रोग और व्याधियाँ किसी को छू भी नहीं पातीं॥10॥
 
That country is like heaven. All the good qualities are said to be present there. Death occurs there at the right time. Diseases and ailments do not touch anyone.॥10॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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