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श्लोक 12.191.7  |
भरद्वाज उवाच
यदेतच्चातुराश्रम्यं ब्रह्मर्षिविहितं पुरा।
तेषां स्वे स्वे समाचारास्तान् मे वक्तुमिहार्हसि॥ ७॥ |
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| अनुवाद |
| ऋषि भारद्वाज ने पूछा - हे प्रभु! पूर्वकाल में ब्रह्मर्षियों ने जिन चार आश्रमों का विभाजन किया है, उनके धर्म क्या हैं? कृपा करके उन्हें बताइए।॥7॥ |
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| Sage Bharadwaj asked - O Lord! What are the respective dharmas of the four ashrams that the Brahmarishis have divided in the past? Kindly tell them. ॥ 7॥ |
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