भृगुरुवाच
स्वधर्माचरणे युक्ता ये भवन्ति मनीषिण:।
तेषां स्वर्गफलावाप्तिर्योऽन्यथा स विमुह्यते॥ ६॥
अनुवाद
भृगुजी बोले - मुने ! जो बुद्धिमान पुरुष अपने वर्ण-धर्म के आचरण में सावधान रहते हैं, वे स्वर्ग के फल प्राप्त करते हैं। इसके विपरीत जो अधर्म का आचरण करता है, वह मोह के वशीभूत होता है॥6॥
Bhriguji said – Mune! Those wise men who remain cautious in the conduct of their varna-based religion, attain the fruits of heaven. On the contrary, the one who practices unrighteousness is under the spell of seduction*॥ 6॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥