श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 191: ब्रह्मचर्य और गार्हस्थ्य आश्रमोंके धर्मका वर्णन  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  12.191.6 
भृगुरुवाच
स्वधर्माचरणे युक्ता ये भवन्ति मनीषिण:।
तेषां स्वर्गफलावाप्तिर्योऽन्यथा स विमुह्यते॥ ६॥
 
 
अनुवाद
भृगुजी बोले - मुने ! जो बुद्धिमान पुरुष अपने वर्ण-धर्म के आचरण में सावधान रहते हैं, वे स्वर्ग के फल प्राप्त करते हैं। इसके विपरीत जो अधर्म का आचरण करता है, वह मोह के वशीभूत होता है॥6॥
 
Bhriguji said – Mune! Those wise men who remain cautious in the conduct of their varna-based religion, attain the fruits of heaven. On the contrary, the one who practices unrighteousness is under the spell of seduction*॥ 6॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas